क्या पाकिस्तान में लगेगा आपातकाल? महंगाई से लोगों का गुस्सा चरम पर, विपक्षी दल कर रहे प्रदर्शन

इस्लामाबाद। आर्थिक व राजनीतिक संकटों से घिरे पाकिस्तान में इस बात की चर्चा है कि देश में सरकार आपातकाल लगा सकती है। बेतहाशा महंगाई के कारण लोगों का गुस्सा चरम पर है और देश में विपक्षी दल इमरान सरकार को सत्ता से हटाने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन संकटों के बीच सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के सेवाविस्तार को लेकर विवाद पैदा हुआ है जिसने संकट को और बढ़ा दिया है।

द न्यूज व जंग ने अपनी रिपोर्ट में शीर्षस्थ सूत्रों के हवाले से कहा है कि सत्ता के शीर्ष पर मौजूद लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं कि जनरल बाजवा के मामले में अगर किसी तरह का (सरकार के) विपरीत फैसला आता है तो इससे देश में पैदा होने वाली किसी भी स्थिति से निपटने के लिए देश में आपातकाल लगाया जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन उच्च पदस्थ सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है क्योंकि अधिकांश उच्च अधिकारी इस सुझाव के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि इससे हालात और बिगड़ेंगे और इनके पूरी तरह से हाथ से निकल जाने का खतरा पैदा हो जाएगा। लेकिन अभी इसकी संभावना को पूरी तरह से खारिज भी नहीं किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आपातकाल लगाने का समर्थन करने वाले नेताओं का कहना है कि अतीत में आपातकाल लगाने के अच्छे नतीजे सामने आ चुके हैं। उनका कहना है कि कम समय के लिए आपातकाल को लगाया जाना नुकसानदेह नहीं होगा। इससे संवैधानिक संकट की स्थिति से निपटा जा सकेगा और समाज में किसी तरह की अशांति पर काबू पाकर सौहार्द्र के साथ लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा।

पाकिस्तान में विपक्षी दलों ने नए सिरे से चुनाव की मांग दोहराई

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में विपक्षी दलों की ऑल पार्टी कांफ्रेंस (एपीसी) ने बिनी किसी हस्तक्षेप वाले ताजा संसदीय चुनाव की मांग दोहराई है। हाल में इमरान सरकार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके जमीयते उलेमाए इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) के नेता मौलाना फजलुर रहमान के नेतृत्व में देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं की मंगलवार को हुई बैठक में यह मांग दोहराई गई।

बैठक के बाद रहमान ने मीडिया से बातचीत में कहा, विपक्षी दलों की एपीसी का मानना है कि देश के सामने मौजूद सभी समस्याओं का समाधान मौजूदा सरकार का खात्मा और नए आम चुनाव हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की मांग है कि देश में फिर से आम चुनाव कराया जाए जिसमें सेना की किसी तरह की भूमिका न हो। उन्होंने कहा कि हमें न तो मौजूदा सलेक्टेड पीएम मंजूर है और न ही भविष्य में होगा।

यह हमारी मांग का निचोड़ है और इससे किसी समझौते का सवाल ही नहीं पैदा होता। रहमान ने कहा कि अपनी यह मांग पूरी होने तक विपक्ष का संघर्ष जारी रहेगा। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी भी बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को 2018 के आम चुनाव को लेकर पहले दिन से आपत्तियां रही हैं। हम भी एक ऐसा आम चुनाव चाहते हैं जो किसी सलेक्टेड सरकार को न चुने।

बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि समग्र राजनीतिक स्थितियों के आकलन में एपीसी ने पाया कि सरकार की अक्षमता के कारण देश का पूरा ढांचा चरमरा गया है। बैठक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से संबंधित प्राधिकरण के गठन को खारिज करती है क्योंकि यह संसद में इस बारे में लिए गए निर्णय के उलट है।

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