राजस्थान के नवजात बच्चों की मौत का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जांच की मांग

राजस्थान के कोटा के अस्पताल में पिछले महीने 100 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी. नवजात बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. डॉक्टर केके अग्रवाल और समाजसेवी बी. मिश्रा की ओर से दाखिल याचिका में रिटायर्ड जज की निगरानी में पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है.

कोटा के अस्पताल में 35 दिनों में 112 बच्चों की मौत के पीछे के प्रमुख कारणों में ठंड के मौसम के अलावा चीन के घटिया चिकित्सा उपकरण, भ्रष्टाचार और कमीशन की वजह सामने आई है. राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि कोटा के जेके लोन अस्पताल में चीन द्वारा निर्मित घटिया उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था.

चीन के उपकरण जिम्मेदारः मंत्री

राजधानी जयपुर में वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों की एक बैठक से इतर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमने चीन के उपकरण की खरीदारी को लेकर एक जांच शुरू की है. एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हेल्थ रोहित कुमार सिंह मामले की जांच करेंगे कि इस तरह के उपकरण की खरीदारी के पीछे कौन है.

इससे पहले राज्य और केंद्र सरकार द्वारा गठित समितियों ने जेके लोन अस्पताल में मौत की प्रमुख वजह हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान असंतुलित हो जाना) को बताया था. हालांकि, अस्पताल में चल रहे कमीशन और भ्रष्टाचार की कहानियां खुद अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा बताई गई.

‘पड़ोसी राज्यों से आए ज्यादा केस’

दूसरी ओर, कोटा के जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक सुरेश दुलारा ने जनवरी के पहले हफ्ते में कहा था कि अस्पताल में जितने बच्चों की मौत हुई है, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत बच्चे पड़ोसी राज्यों और राजस्थान के अन्य जिलों के थे और उनकी हालत गंभीर थी.

जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक सुरेश दुलारा ने कहा कि मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से आए कई बीमार बच्चों की हालत गंभीर थी और इसके बावजूद उन्होंने इतना लंबा सफर किया. दिसंबर में सर्दी बहुत ज्यादा थी, जिसमें बच्चों को आसानी से सर्दी लग जाती है और अगर जल्दी सतर्क न हुआ जाए तो स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ती है. इसी कारण यहां मृत्यु दर बढ़ी.

क्या होता है हाइपोथर्मिया

राजस्थान सरकार द्वारा बच्चों की मौतों के कारण का पता लगाने के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की है कि हाइपोथर्मिया के कारण शिशुओं की मौत हुई. हाइपोथर्मिया एक ऐसी आपात स्थिति होती है, जब शरीर का तापमान 95 एफ (35 डिग्री सेल्सियस) से कम हो जाता है. वैसे शरीर का सामान्य तापमान 98.6 एफ (37 डिग्री सेल्सियस) होता है.

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अस्पताल में बच्चे सर्दी के कारण मरते रहे और यहां पर जीवन रक्षक उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में नहीं थे. (इनपुट-आईएएनएस)

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