4335 करोड़ रुपए का फ्रॉड केस : PMC बैंक के पूर्व चेयरमैन 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में

मुंबई। मुंबई की एक अदालत ने रविवार को संकटग्रस्त पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (पीएमसी) के पूर्व चेयरमैन एस. वरयाम सिंह को नौ अक्टूबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया। अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी। मुंबई पुलिस की इकोनोमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने शनिवार देर रात माहिम से सिंह को गिरफ्तार किया और रविवार को दंडाधिकारी न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत किया।

पुलिस ने कहा कि हाउसिंग डवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) से संबंधित कथित रूप से 4335 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले में उनसे पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने अदालत से कहा कि चूंकि वे पीएमसी बैंक के चेयरमैन और साथ ही एचडीआईएल के कार्यकारी निदेशक भी रहे, इसलिए पुलिस अन्य आरोपियों के साथ बैठाकर उनसे आमने-सामने पूछताछ करना चाहती है।

वरयाम सिंह के वकील वी. कृष्ण ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपनी मर्जी से आत्मसमर्पण किया है और गलत तरीके से प्रचारित कर यह बताया जा रहा है कि उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कृष्ण ने यह भी कहा कि वरयाम का बैंक में आए-दिन होने वाले कार्यों से कोई वास्ता नहीं था। इसे उसके पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस द्वारा प्रबंधित किया गया था और वे केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहे थे। कृष्णा ने कहा, मेरे मुवक्किल केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते थे। स्वीकृत ऋणों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। सभी दस्तावेज ईओडब्ल्यू और आरबीआई द्वारा नियुक्त प्रशासक के पास हैं।

दो हफ्ते पहले पीएमसी बैंक में सामने आई अनियमितताओं के बाद से 68 वर्षीय सिंह लापता थे। वे माहिम में छिपे थे और पुलिस ने पता लगाकर उन्हें पकड़ लिया। शनिवार को अपनी गिरफ्तारी से पहले सिंह ने ईओडब्ल्यू के डीसीपी पराग मनेरे को एक हस्ताक्षरित पत्र भेजकर कहा कि उन्होंने शाम तक ईओडब्ल्यू के सामने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है और वे सहयोग करने को तैयार हैं।

हालांकि, उनके अंधेरी निवास के पास तैनात पुलिस टीम नजर बनाए हुए थी और सिंह का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पीएमसी बैंक मामले में यह तीसरी मुख्य गिरफ्तारी हुई है। इससे पहले लापता चल रहे प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया था। गुरुवार को मामले में पुलिस ने एचडीआईएल के चयरमैन और प्रबंध निदेशक राकेश कुमार वधावन और सारंग वधावन को गिरफ्तार करते हुए उनकी 3,500 करोड़ की संपत्ति को जब्त कर लिया था।

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